इंसान अपनी आँखों से देख सकेगा सुपरनोवा विस्फोट। बीटलज्यूस तारा अपने अंतिम चरण में।



इस कभी ना ख़त्म होने वाले ब्रह्माण्ड में होने वाली अनंत घटनाओं को देखने का सौभाग्य हर किसी को प्राप्त नहीं होता है। एक सुपरनोवा विस्फोट भी इन्हीं रोमांचकारी घटनाओं की श्रेणी में गिना जाता है। मनुष्य एक निश्चित दुरी तक ही देखने में सक्षम है लेकिन बहुत ही जल्द मनुष्य भी सुपरनोवा विस्फोट अपनी आँखों से देख सकेगा।
जी हाँ, आपने बिलकुल सही पढ़ा, पृथ्वी से लगभग 650 प्रकाश वर्ष दूर एक तारे बीटलज्युस का खगोलविदों के द्वारा कईं वर्षों तक अध्ययन करने के बाद खगोलविदों ने यह पुष्टि की है कि यह तारा अपने जीवन के अंतिम चरणों में पहुँच चूका है और जल्द ही इसमें सुपरनोवा विस्फोट होने की संभावना है।

बीटलज्युस तारा एक लाल दानवीय और विशालकाय तारा है। इसे अंतरिक्ष के दस सबसे अधिक चमकीले तारों में शामिल किया गया है। लेकिन कुछ महीनों पहले इस तारे ने अजीब व्यवहार करना शुरू कर दिया जिससे खगोलविदों को इसके सुपरनोवा की स्तिथि में जाने की पुष्टि हुई।


इस तस्वीर में आप बीटलज्युस तारे को देख सकते है। 



खगोलविदों के अनुसार यह तारा कुछ दिनों के अंतराल में अपनी चमक में फीकापन महसूस कर रहा है और कभी-कभी अचानक ही अत्यधिक चमकने लगता है। वैसे हम आपको बता देंगे की इस तारे की उम्र 8.5 मिलियन वर्ष हैं और यह अपने जीवनकाल के अंतिम क्षणों की ओर अग्रसर हो रहा है। खगोलविदों के अनुसार यह आने वाले दस हजार वर्षों में सुपरनोवा विस्फोट में परिवर्तित हो जाएगा। पृथ्वी पर यह चाँद की तरह कईं महीनो तक चमकता रहेगा एवं इसका नजारा बहुत ही सुंदर होगा। इसकी तरंगों का पृथ्वी पर कोई ख़ास प्रभाव नहीं होगा। यदि बीटलज्युस तारे को हमारे सौरमंडल के सूर्य के स्थान पर रखकर देखा जाए तो यह बृहस्पति के साथ-साथ शनि ग्रह के स्थान को भी घेर लेगा।

दुनियाभर के अंतरिक्ष प्रेमी भी इस तारे पर अपनी नज़रे गढ़ाए हुए हैं। उनका मानना हैं की बीटलज्युस तारे में बहुत समय पहले ही सुपरनोवा विस्फोट हो चूका है। यह एक बहुत बड़ा रहस्य है, और यह एक कारण है कि इस तारे का वर्तमान व्यवहार पेचीदा है। वैज्ञानिकों को संदेह है कि इस तारे की चमक में एक तेज गिरावट एक तारे  के निधन को चित्रित कर सकती है।

"जब कोई तारा अपने जीवन के अंतिम क्षणों में होता है तो वह अत्यधिक और एक बहुत बड़े पैमाने पर द्रव्यमान और धुल के कणों की क्षति का अनुभव करता है " यह धुल के कण उस तारे के आस-पास फैल जाते है। धुल के कणों की अत्यधिक मात्रा होने की वजह से वहां पर घने बादल बन जाते हैं जिस वजह से तारों की चमक में धुंधलापन दिखाई देता है।

बीटलज्यूस तारे को अर्द्धगोलाकार चर तारे की श्रेणी में रखा गया है जिसका अर्थ यह है कि इसकी चमक हर अर्धवार्षिक में बदलती रहती हैं। यह तारा अपनी धूरि पर एक पूर्ण चक्कर लगाने के नियमों को बहिष्कृत करता है इसलिए इसके धुंधलेपन की एक यह भी वजह हो सकती है। हालांकि यह अभी तक ज्ञात नहीं हुआ है।

हाल के अध्ययनों से पता चलता है कि यह तारा अगले कईं मिलियन वर्षों में सबसे विस्फोट करेगा, हो सकता है अगले दस हजार सालो में या फिर यह पहले ही विस्फोट हो चूका हैं।



















Reactions

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ