वॉर्महोल की सम्पूर्ण जानकारी

वॉर्महोल

अंतरिक्ष असंख्य असंभावनाओं से भरा हुआ होता है। कईं राज इसमें ऐसे हैं जिन्हें वैज्ञानिक आज
तक ढूंढ नहीं पाए है। वॉर्महोल भी एक राज ही है जो वैज्ञानिकों का सर-दर्द बना हुआ है। अंतरिक्ष
में एक सुरंग को आप वॉर्महोल कह सकते है जिसके जरिए आप एक जगह से दूसरी जगह आसानी
से जा सकते है। इसको आप इस तरह समझ सकते है जैसे : यदि आपको मुंबई से दिल्ली जाना है
तो आप ट्रैन से जाना पसंद करेंगे जिससे आपको कम से कम 12 से 13 घंटे लगेंगे लेकिन आपको
दिल्ली जल्दी पहुंचना हो तो आप हवाई जहाज से सिर्फ 2 घंटे में ही जा सकते है। इसे ही एक तरह
का वॉर्महोल कह सकते है। सरल शब्दों में यदि कहें तो अंतरिक्ष में एक जगह से दूसरी जगह जाने
का एक शॉर्टकट रास्ता ही वॉर्महोल कहलाता है। पहली बार वॉर्महोल का सिद्धांत सन 1916 में दिया
गया था लेकिन उस वक़्त कोई ये नहीं जानता था की इसे किस नाम से पुकारा जाए। बाद में मशहूर
और महान भौतिकशास्त्री अल्बर्ट आईंस्टाईन ने अपने सापेक्षता के सिद्धांत में इसकी व्याख्या की थी। 

क्या सच में वॉर्महोल होते है?

इसका जवाब हर किसी के पास नहीं होता है। वॉर्महोल को लेकर कईं बड़े वैज्ञानिकों में मतभेद रहे हैं।
मशहूर वैज्ञानिक सर स्टीफन हॉकिंस मानते थे कि वॉर्महोल ब्रह्माण्ड में कहीं ना कहीं मौजूद है। उनके
अनुसार वॉर्महोल किसी ब्लैकहोल के अंदर भी हो सकता है। 
1935 में अल्बर्ट आईंस्टाईन और नैथन रोज़ेन ने सापेक्षता के सिद्धांत की मदद से यह साबित किया कि
अंतरिक्ष में स्थित किन्हीं दो बिंदुओं के मध्य एक शॉर्टकट रास्ता होता है जहां पर दुरी और समय कम हो
जाता है। इसके बाद इसको आईंस्टाईन रोज़ेन ब्रिज या वॉर्महोल के नाम से पहचान मिली। आईन्स्टाईन ने
इसे गणितीय भाषा में तो सिद्ध किया था लेकिन आज तक कोई भी वैज्ञानिक इसे प्रायोगिक स्टार पर सिद्ध
नहीं कर पाया है। इसलिए इसे सिर्फ एक कोरी कल्पना ही मानना उचित नहीं होगा क्योंकि हो सकता है
कि आने वाले कुछ वर्षों में कोई वैज्ञानिक सिद्ध भी कर दे। 

क्या कोई प्राणी इसके माध्यम से यात्रा कर है?

कईं फिल्मों और किताबों में वॉर्महोल से यात्राओं के वृत्तांत दर्शाए गए है और देखने वालों को रोमांचक
लगता है लेकिन अब तक हुए कईं अध्ययनों से यह जानकारी सामने आई है कि यदि वैज्ञानिक अंतरिक्ष
में कोई वॉर्महोल खोज ले तो भी कोई प्राणी इसके अंदर नहीं जा सकता है। अब तक जिन वॉर्महोलों
गणना की गयी है उनका आकार अत्यधिक कम है और दूसरी समस्या है उनका एक जगह पर अधिक
समय तक ना रुकना और जल्दी ही टूट जाना। इसलिए यदि वॉर्महोल को स्थिर कर दें और इसके आकर
में वृद्धि कर दी जाए तो शायद जरिए यात्रा करना संभव हो सकता है। लेकिन सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण
समस्या यह है की क्या इस प्रकार का कोई माध्यम ब्रह्माण्ड में उपस्थित है या नहीं और यदि इस प्रकार
का कोई माध्यम ब्रह्माण्ड में उपस्थित है तो वह कहाँ है?
वैसे यह संभव हो सकता है क्योंकि 2019 में वैज्ञानिकों ने एक बहुत बड़े ब्लैक-होल की तस्वीर सम्पूर्ण विश्व
के सामने प्रस्तुत की थी जो पूर्णतः आईन्स्टाईन के सापेक्षता के सिद्धांत को परिभाषित कर रही थी। इसी
प्रकार वॉर्महोल का सिद्धांत भी उन्होनें ही दिया था इसलिए आज भी कईं वैज्ञानिक इस सिद्धांत को  मानते है। 


लेखक : प्रशांत पंचोले 
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