हबल स्पेस टेलिस्कोप
मनुष्य की महत्वकांक्षाओं का कोई अंत नहीं है। प्राचीन काल से ही मनुष्य ब्रह्माण्ड को जानने और समझने की कोशिशों में लगा हुआ है। लेकिन खुली आँखों से मनुष्य उतना ही देख सकता था जितना हम आज देख पाते है। कईं हद तक मनुष्यों को सफलता भी मिली। 400 साल पहले गैलीलियो नाम के व्यक्ति ने सबकुछ बदल दिया। वे अपने समय के सबसे महान पुरुष और वैज्ञानिक थे जिन्होनें कईं खोजें की और इन खोजों ने मानव इतिहास को एक नया नजरिया दिया और अनंत ज्ञान की गंगा में डुबकी लगाने पर मजबूर कर दिया। गैलीलियो ने सन 1610 में अपने टेलिस्कोप से जब ब्रह्माण्ड की सैर करना शुरू किया तब उन्होनें पूरी दुनिया को ग्रहों और अन्य अंतरिक्ष पिंडों की जानकारी दी। यह एक छलांग थी जिसने दुनिया ही बदल डाली। आकाशगंगा, बुध, शुक्र, शनि, बृहस्पति आदि ग्रहों के बारे में दुनिया को जानने का मौका मिला।
इसके कुछ सालों बाद बहुत ही तेजी से ब्रह्माण्ड की नई-नई जानकारियां मनुष्यों को प्राप्त होने लगी। नेब्युला, दूसरी आकाशगंगाएँ, ब्लैक होल आदि जानकारियां मनुष्यों ने अपने पास एकत्रित की परन्तु यंत्रों की कमी की वजह से अधिक दुरी तक देख पाना और शोध करना वैज्ञानिकों के लिए बहुत ही मुश्किल होता था इसलिए सन 1990 में एक बहुत ही महान वैज्ञानिक एडविन पी. हबल के नाम पर हबल टेलिस्कोप का निर्माण कार्य सम्पूर्ण किया गया और इसे पृथ्वी की कक्षा में सफलता-पूर्वक विस्थापित किया गया। हबल स्पेस टेलिस्कोप, गैलीलियो टेलिस्कोप से बेहतर है तथा यह पहला ऐसा टेलिस्कोप था जिसे पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया गया था।
2020 में हबल स्पेस टेलिस्कोप की उम्र 30 वर्ष हो जाएगी और इस वर्ष यह पूरी तरह से काम करना भी बंद कर देगा। अपनी 30 वर्ष की उम्र में अब तक हबल स्पेस टेलिस्कोप ने दुनिया को कईं हैरतअंगेज तस्वीरों से रूबरू करवाया। कईं नेब्युलाओं की खोज की और कईं ग्रहों की भी खोज की। इसने असंख्य आकाशगंगाओं को समझने में वैज्ञानिकों की सहायता की और मनुष्य को अंतरिक्ष की अहम् जानकारियाँ दी ताकि मनुष्य ब्रह्माण्ड के रहस्य जानने के लिए व्याकुल और उत्सुक रहे।
हबल स्पेस टेलिस्कोप को नासा और यूरोप की अंतरिक्ष संस्थान ने मिलकर बनाया है। इसकी लम्बाई 43.5 फ़ीट है, वजन 11,110 किलोग्राम है तथा इसकी चौड़ाई अधिक से अधिक 14 फ़ीट है।
लेखक : प्रशांत पंचोले
मनुष्य की महत्वकांक्षाओं का कोई अंत नहीं है। प्राचीन काल से ही मनुष्य ब्रह्माण्ड को जानने और समझने की कोशिशों में लगा हुआ है। लेकिन खुली आँखों से मनुष्य उतना ही देख सकता था जितना हम आज देख पाते है। कईं हद तक मनुष्यों को सफलता भी मिली। 400 साल पहले गैलीलियो नाम के व्यक्ति ने सबकुछ बदल दिया। वे अपने समय के सबसे महान पुरुष और वैज्ञानिक थे जिन्होनें कईं खोजें की और इन खोजों ने मानव इतिहास को एक नया नजरिया दिया और अनंत ज्ञान की गंगा में डुबकी लगाने पर मजबूर कर दिया। गैलीलियो ने सन 1610 में अपने टेलिस्कोप से जब ब्रह्माण्ड की सैर करना शुरू किया तब उन्होनें पूरी दुनिया को ग्रहों और अन्य अंतरिक्ष पिंडों की जानकारी दी। यह एक छलांग थी जिसने दुनिया ही बदल डाली। आकाशगंगा, बुध, शुक्र, शनि, बृहस्पति आदि ग्रहों के बारे में दुनिया को जानने का मौका मिला।
इसके कुछ सालों बाद बहुत ही तेजी से ब्रह्माण्ड की नई-नई जानकारियां मनुष्यों को प्राप्त होने लगी। नेब्युला, दूसरी आकाशगंगाएँ, ब्लैक होल आदि जानकारियां मनुष्यों ने अपने पास एकत्रित की परन्तु यंत्रों की कमी की वजह से अधिक दुरी तक देख पाना और शोध करना वैज्ञानिकों के लिए बहुत ही मुश्किल होता था इसलिए सन 1990 में एक बहुत ही महान वैज्ञानिक एडविन पी. हबल के नाम पर हबल टेलिस्कोप का निर्माण कार्य सम्पूर्ण किया गया और इसे पृथ्वी की कक्षा में सफलता-पूर्वक विस्थापित किया गया। हबल स्पेस टेलिस्कोप, गैलीलियो टेलिस्कोप से बेहतर है तथा यह पहला ऐसा टेलिस्कोप था जिसे पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया गया था।
2020 में हबल स्पेस टेलिस्कोप की उम्र 30 वर्ष हो जाएगी और इस वर्ष यह पूरी तरह से काम करना भी बंद कर देगा। अपनी 30 वर्ष की उम्र में अब तक हबल स्पेस टेलिस्कोप ने दुनिया को कईं हैरतअंगेज तस्वीरों से रूबरू करवाया। कईं नेब्युलाओं की खोज की और कईं ग्रहों की भी खोज की। इसने असंख्य आकाशगंगाओं को समझने में वैज्ञानिकों की सहायता की और मनुष्य को अंतरिक्ष की अहम् जानकारियाँ दी ताकि मनुष्य ब्रह्माण्ड के रहस्य जानने के लिए व्याकुल और उत्सुक रहे।
हबल स्पेस टेलिस्कोप को नासा और यूरोप की अंतरिक्ष संस्थान ने मिलकर बनाया है। इसकी लम्बाई 43.5 फ़ीट है, वजन 11,110 किलोग्राम है तथा इसकी चौड़ाई अधिक से अधिक 14 फ़ीट है।
लेखक : प्रशांत पंचोले
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