क्या एलियन हमारे बीच रहते हैं -


ज़िन्दगी को समझना और पहचानना बहुत ही आसान होता है। यह चलती फिरती रहती है। नए आयाम तलाशती रहती है। यह अपने शरीर को मजबूत करने के लिए खाना खाती है, बड़ी होती है, जन्म देती है और मरती भी है। सरल शब्दों में कहे तो यह अपने वज़ूद को तराशती है।

कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि दूसरी दुनिया में जीवन को तलाशना थोड़ा कठिन है और ऐसा भी हो सकता है कि दूसरी दुनिया के जीव हमारे बीच रह रहे हो और हमें अभी तक पता भी नहीं चल सका है। वह जीव आपके आस-पास भी मौज़ूद हो सकता है।  मनुष्य रूप में ना सही लेकिन अन्य जीव के रूप  में भी वह जीव अपना जीवनकाल संपन्न कर रहा होगा।  लेकिन क्या ऐसा होना संभव है?

वैसे पृथ्वी पर जीवन की खोज करना सबसे आसान है। इसे परिभाषित करना थोड़ा सा मुश्किल होता है। वैज्ञानिकों और विद्वानों की एक पूरी जमात ही इसे परिभाषित करने के लिए सदियों से कोशिश कर रही है लेकिन आज तक कोई भी एक सम्मत नहीं हो पाया है। वैसे किसी ज़िंदगी को समझना बहुत आसान है जैसे : किसी मशीन में यदि विद्युत् प्रवाहित की जाती है तब वह स्वतः कार्य करने लगती है। ठीक उसी तरह जैसे कोई जीवित प्राणी अपने शरीर को निरंतर ऊर्जावान रखने के लिए खाना खाता है।

वैसे ज़िन्दगी की असंख्य परिभाषाएँ है लेकिन अधिकतर विद्वान इस पर विश्वास नहीं करते है। दूसरे ग्रहों पर जिंदगी को खोजना वैज्ञानिकों के लिए मुश्किल है, ज़ाहिर सी बात है हमारे पास उचित यंत्र नहीं है। इसका एक दूसरा विकल्प भी हो सकता है लेकिन वह अपूर्ण ही कहलायेगा जब तक की वह तथ्यों और सबूतों के आधार पर सही साबित नहीं हो जाता है।

ब्रह्माण्ड में जीवन की खोज करना एक बड़ी समस्या है और जीवन को परिभाषित कर पाना सबसे मुश्किल समस्याओं में से एक है। जब तक हम देखेंगे नहीं तब तक हम जान नहीं पाएंगे की ब्रह्माण्ड में कहाँ पर जीवन मौजूद है। दरअसल हम लोगों ने मान लिया है कि दूसरे ग्रहों पर भी मनुष्यों जैसे ही प्राणी रहते होंगे। जब भी हम किसी परग्रही (एलियन) के बारे में सोचते है तो हमारे सामने मनुष्यों जैसा आकार लिए किसी संरचना का चित्र मस्तिष्क में दिखाई देता है। लेकिन क्या एलियन मनुष्यों जैसे दिखाई देते है? नहीं।  एलियन मनुष्यों से भी अधिक बुद्धिमान हो सकते है या फिर उनका आकार उनके ग्रहों के वातावरण पर निर्भर करता होगा। संभावनाओं का कोई अंत नहीं होता है। इसका मतलब है कि हम उनका अध्ययन नहीं कर सकते या उन्हें नोटिस भी नहीं कर सकते क्योंकि वे हमारी समझ से बाहर हैं। यदि हम यह मान लें कि वे हमारे बीच मौजूद है तो वे सिर्फ सूक्ष्म अवतार में  मौजूद हो सकते हैं या फिर वे अदृश्यता लिए हमारे बीच घूम-फिर रहे होंगे।

तो अब सवाल यह है कि अब तक हमने उन्हें खोजा क्यों नहीं? संसाधनों और उचित यंत्रों की कमी ही है इसकी ख़ास वजह। इसका सीधा सा मतलब है की अब तक हमने पृथ्वी पर ही कईं जीवों की खोज नहीं की है और यह जीव वही जीव है जिन्हें हम एलियन कह सकते है।

संरचना की संभावना

पृथ्वी गृह लगभग 90 प्रतिशत सिलिकॉन, कार्बन, लौह, मैग्नेसियम और ऑक्सीजन से बना है इसका मतलब साफ़ है की यहां पर हर प्रकार का जीवन संभव हो सकता है। बस यदि मनुष्य एलियन की संरचना मनुष्यों जैसी ना सोचे। सिलिकॉन कार्बन से मिलता जुलता पदार्थ है सिर्फ फर्क इतना है की सिलिकॉन कार्बन से थोड़ा भारी होता है। पृथ्वी पर जीवन पृथ्वी की अनेक दूसरी संरचनाओं से मौलिक रूप से अलग है जिनकी संख्या मनुष्यों और प्राणियों से भिन्न है और बहुत ही तादात में विध्यमान है। दूसरी तरफ देखा जाए तो सिलिकॉन पृथ्वी की लगभग-लगभग प्रत्येक चट्टान में मौजूद है। जबकि, पृथ्वी पर जीवन की रासायनिक संरचना का सूरज की रासायनिक संरचना के साथ अनुमानित संबंध है। इसलिए शायद सिलिकॉन के रूप में भी एलियन अपना जीवन पृथ्वी पर जी रहे हो।

जब हम अंतरिक्ष में किसी जगह के बारे में सोचते है जहां पर जीवन पनप रहा हो जैसे की मंगल ग्रह, जहां पर जीवन के थोड़े बहुत ही सबुत वैज्ञानिकों को मिलते ही रहते है और यदि बात करें शनि ग्रह के चन्द्रमा टाइटन की जहां पर तरल पदार्थ होने के पूर्ण सबूत है वहां पर भी वातावरण के अनुसार जीवन हो सकता है या सिलिकॉन आधारित जीवन भी वहां मौजूद हो सकता है। यह ढूंढने के लिए हमें जीव विज्ञान के बुनियादी नियमों को दूर रखना होगा और पृथ्वी पर मौजूद प्राणियों की संरचना और बनावट को भूलना जरुरी है।

भले ही कई लोगों का मानना है कि जीवन ब्रह्मांड में कहीं और मौजूद है लेकिन हमारे पास कोई साक्ष्य नहीं है। अब तक ब्रह्माण्ड में पृथ्वी ही एक ऐसा ग्रह है जहां जीवन मौजूद है इसलिए यहाँ मौजूद हर एक जीवित प्राणी को अनमोल मानना महत्वपूर्ण है, चाहे इसका आकार, मात्रा या स्थान कोई भी हो। सौरमंडल या अंतरिक्ष में कहीं पर भी जीवन हो सकता है लेकिन फ़िलहाल कोई महत्त्व नहीं है। बस हमें सिर्फ जीवन की रक्षा करना है फिर चाहे वह ब्रह्माण्ड में कहीं भी मौजूद हो।

लेखक : प्रशांत पंचोले 
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