पृथ्वी ग्रह से गुरुत्वाकर्षण की कुछ बहुत पुरानी तरंगे 14 जनवरी 2020 के दिन टकराई और आगे चली गई। यह सिर्फ सेकंड के भी आधे भाग से काम समय तक ही ज्ञात हो सकी। जिसकी वजह से थोड़ी देर ही सही लेकिन अंतरिक्ष-समय में विकृति उत्पन्न करने में यह गुरुत्वाकर्षण तरंगे सक्षम रही। लेकिन शोधकर्ताओं को अभी तक यह ज्ञात नहीं हो सका है की यह तरंगे अंतरिक्ष के किस बिंदु से आ रही है।
लेज़र इंटरफेरोमीटर ग्रेविटेशनल वेव ऑब्जर्वेटरी (LIGO) हुए वर्गो इंटरफेरोमीटर के द्वारा इन तरंगों को पहचाना गया। यह सिर्फ 14 मिलीसेकंड के लिए ही संसूचकों का ध्यान अपनी और आकर्षित करने में सफल हुई इस वजह से अंतरिक्ष वैज्ञानिक अभी तक इस बात का पता नहीं लगा पाएं हैं की वह गुरुत्वाकर्षण तरंगे अंतरिक्ष के किस बिंदु से पृथ्वी तक आने में सक्षम हो रही है। परन्तु वैज्ञानिकों का यह कहना हैं की यह गुरुत्वाकर्षण तरंगे किसी विस्फोट से उत्पन्न हुई है।
अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण तरंगे तब उत्पन्न होती है जब कोई विशालकाय अंतरिक्षीय पिंड या कोई वस्तु आपस में टकराते हैं, यह कुछ भी हो सकते हैं जैसे दो न्यूट्रॉन तारों का टकराना या दो ब्लॉक होल आपस में टकराए हो। खगोलविदों को ऐसी ही गुरुत्वाकर्षण तरंगे अप्रैल 2017 में और 2019 में भी ज्ञात हुई थी।
लॉस कम्ब्रेस ऑब्जर्वेटरी ग्लोबल टेलीस्कोप नेटवर्क में कार्यरत एक वैज्ञानिक और कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, सांता बारबरा में भौतिकी संकाय के एक सहायक सदस्य एंडी हॉवेल ने कहा की :- ऐसी भारी वस्तुओं के टकराने से गुरुत्वाकर्षण तरंगें आम तौर पर लंबे समय तक चलती हैं और बाद में तरंगों की एक श्रृंखला के रूप में प्रकट होती हैं जो समय के साथ आवृत्ति में बदलती हैं क्योंकि दो परिक्रमा करने वाली वस्तुएं गुरुत्वाकर्षण बल की वजह से एक दूसरे के करीब आती रहती हैं। हॉवेल ने आगे कहा की यह नए संकेत तरंगों की श्रृंखला नहीं हो सकती है जबकि यह सिर्फ एक ही बार पृथ्वी तक पहुंची है तथा यह तरंगे के सिर्फ एक ही स्थान पर प्राप्त हुई है। ऐसा भी हम कह सकते हैं की यह गुरुत्वाकर्षण तरंगे किसी छोटे माध्यम से आ रही हो, जैसे : कईं प्रकाश वर्ष दूर स्थित किसी सुपरनोवा विस्फोट हुआ हो या दो न्यूट्रॉन तारे आपस में टकराए हो या किसी तारे की मृत्यु हो रही हो?
हॉवेल ने कहा, इसके अलावा खगोलविदों को यह शंका थी की यह गुरुत्वाकर्षण तरंगे बीतलज्यूस तारे से आ रही हैं क्योंकि कुछ दिन पहले ही उस तारे में ऊर्जा की क्षमता अत्यधिक कम हो गयी थी एवं उसमे सुपरनोवा विस्फोट होते-होते रह गया था। लेकिन यह सिर्फ एक भ्रान्ति ही थी क्योंकि वह तारा अभी भी वहीँ स्थित है। उन्होनें आगे यह भी कहा की हो सकता है यह तरंगे किसी सुपरनोवा की ही हो क्योंकि हर सौ सालों में एक सुपरनोवा की घटना घटित होती ही है।
एक विशालकाय तारे के पतन से हम सोचते है की इसका विस्फोट अत्यधिक प्रभावशाली होगा लेकिन यहां देखकर पता चलता है की जैसा हम सोचते है और जैसी हम उम्मीद लगाते हैं वैसा हो नहीं पाता है जबकि उससे भी कम परिणाम देखने को मिलते हैं। वहीं यदि हम दूसरा पहलू देखें तो आज तक हमने किसी तारे को गुरुत्वाकर्षण तरंगे निकालते नहीं देखा है। लेकिन खगोलविदों को ऐसी किसी भी ऊर्जा का पता नहीं लगा है जिसकी वजह से सुपरनोवा विस्फोट होने संभावना होती है।
हॉवेल ने कहा की दूसरी संभावना यह है की जब दो मध्यवर्ती-द्रव्यमान वाले ब्लैक होल एक-दूसरे में विलय होते हैं तब यह स्थिति उत्पन्न हो सकती है। न्यूट्रॉन तारों के विलय से तरंगे अधिक देर तक रहती है जबकि इन तरंगों का समय बहुत ही कम था। जबकि दो ब्लैक होल जब एक-दूसरे में विलय होते हैं तब इन तरंगों का जीवनकाल सिर्फ १ सेकंड या इसके आस-पास ही होता है। हालांकि, जब दो मध्यवर्ती ब्लैक होल का आपस में विलय भी तरंगों की एक श्रृंखला जारी कर सकते हैं जो आवृत्ति में बदलते हैं।
LIGO ने जब इस विस्फोट को अंतरिक्ष में मापा तब वह इस निष्कर्ष पर आया लेकिन इसका मतलब यह नहीं है की यह एक आंतरिक समूह के दृव्यमान वाला ब्लैक होल का विलय है। हॉवेल ने कहा की, हमें नहीं पता है की उन्होनें क्या खोज की ? क्योंकि LIGO ने अब तक कोई इन तरंगों की स्पष्ट संरचना प्रस्तुत नहीं की है।
इस रहस्यमय विस्फोट के लिए अन्य स्पष्टीकरण भी हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, एक सुपरनोवा सीधे न्यूट्रॉन पदार्थों और ऊर्जा का उत्पादन किए बिना एक ब्लैक होल में गिर सकता है, हालांकि इस घटना का सिर्फ अंदाजा ही लगाया जा सकता है। वैसे भी ब्रह्माण्ड असंख्य रहस्यों से भरा हुआ है इसलिए कुछ भी हो सकता है।
लेखक - प्रशांत पंचोले
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