प्रकाश वर्ष
" खगोलीय पिंडों की दुरी ज्ञात करने के लिए जिस इकाई का प्रयोग किया जाता है उसे प्रकाश वर्ष कहते है तथा यह दुरी का मात्रक है। सूर्य के प्रकाश के द्वारा पृथ्वी के एक वर्ष में चली गई दूरी को एक प्रकाश वर्ष कहते हैं। "
यहां पर सूर्य के प्रकाश के बारे में इसलिए दर्शाया गया है क्योंकि पृथ्वी के समीप सबसे बड़ा प्रकाशित और ऊर्जा का सबसे बड़ा स्त्रोत सूर्य ही है तथा सूर्य के अलावा हमारे सबसे नजदीक का तारा प्रोक्सिमा सेन्टौरी पृथ्वी से 4.3 प्रकाश वर्ष दूर स्थित है। हमारी पडोसी आकाशगंगा एन्ड्रोमीडा भी पृथ्वी से लगभग 25 लाख प्रकाश वर्ष दूर स्थित है।
वैज्ञानिक समुदाय बहुत ही असमंजस में रहते थे की ब्रह्माण्ड में एक पिंड की दुरी को किसी दूसरे पिंड तक कैसे ज्ञात किया जाए। कईं वैज्ञानिकों के अलग-अलग मत थे कित्नु एक खगोलविद और वैज्ञानिक फ्रेडरिक बेसेल ने सन 1838 में प्रकाश वर्ष की सटीक व्याख्या की थी। जब फ्रेडरिक बेसेल एक तारे 61 सिग्नी का गहन अध्ययन कर रहे थे तब पहली बार किसी व्यक्ति के द्वारा किसी अंतरिक्षीय पिंड की दुरी नापी गई जिसे जिसे लंबन विधि के द्वारा नापा गया था और वह दुरी लगभग 10.3 प्रकाश वर्ष मानी गई तथा पूरी दुनिया को पहली बार प्रकाश वर्ष के बारे में जानकारी प्राप्त हुई। नापी गई दुरी उपकरणों और अधूरे ज्ञान की वजह से सटीक नहीं थी। बाद में जब अन्य वैज्ञानिकों द्वारा अध्ययन किया गया तब उस तारे की पृथ्वी से 11.3 दुरी नापी गई। 61 सिग्नी तारा द्विआधारी सौरमंडल का हिस्सा है।
प्रकाश प्रति सेकंड 299,792,458 मीटर (186,282.397 मील) की यात्रा करता है। एक वर्ष (31,557,600) में सेकंड की संख्या से उस संख्या को गुणा करें तो एक प्रकाश वर्ष 9,460,730,473,000 किलोमीटर या 5,878,625,373,000 मील है।
ब्रह्माण्ड के लिए किलोमीटर या मील अत्यंत सूक्ष्म इकाई है। इसलिए ब्रह्माण्ड में स्थित हर एक पिंड की दुरी को नापने के लिए प्रकाश वर्ष का उपयोग किया जाता है। जब से मनुष्य पृथ्वी से आसमान की ओर देखता है तो उसे कईं तारे आपस में जुड़े हुए दिखाई देते हैं या एक-दूसरे से बतियाते हुए प्रतीत होते हैं लेकिन गणनाओं से प्राप्त संख्याओं और अंकन से मिले सबूतों के आधार पर हर एक तारा एक-दूसरे से कईं प्रकाश वर्ष की दुरी पर स्थित है। मनुष्य तक सिर्फ उन तारों का प्रकाश आता है जो की कईं सालों पहले उनसे उत्सर्जित हुआ था। जिसका सीधा सा यह अर्थ हुआ की हम जिन तारों को अक्सर देखते हैं असल में वह तारे भूतकाल का हिस्सा है। क्योंकि तारों के द्वारा जब प्रकाश का उत्सर्जन हो रहा था तब से लेकर पृथ्वी तक आने में अत्यधिक दुरी की वजह से उन्हें कईं वर्षों तक की यात्रा करनी पड़ती है।
कुछ महीनों से एक तारा बीटलज्युस में सुपरनोवा विस्फोट के बारे में बहुत अधिक खबरे आ रही जो पृथ्वी से लगभग 650 प्रकाश वर्ष अधिक दुरी पर स्थित है जिसका अर्थ स्पष्ट है कि उस तारे के प्रकाश को पृथ्वी तक पहुँचने में 650 वर्ष लगते हैं। ऐसा ही एक दूसरा तारा भी है जो आसमान में स्थित सबसे अधिक चमकीला तारा है जिसका नाम सिरियस है तथा अब तक का ज्ञात सबसे अधिक चमकीला तारा भी है। सिरियस की पृथ्वी से लगभग 8.2 प्रकाश वर्ष दुरी है। इसका स्पष्ट अर्थ यह है कि इसके प्रकाश को पृथ्वी तक आने में 8 साल से भी अधिक का समय लगता है। इसको हम ऐसे भी मान सकते है कि हमारी आँखों के द्वारा देखि गई हर खगोलीय घटना भूतकाल में घटित हो चुकी है। जैसे - बीटलज्युस तारे में 600 प्रकाश वर्ष पहले सुपरनोवा विस्फोट हो चूका है किन्तु खगोलविदों को इस विस्फोट की जानकारी कुछ महीनों पहले ही कुछ अध्ययनों के द्वारा प्राप्त हुई।
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