आइंस्टाइन के सिद्धांत फिर से हुए सिद्ध। एक मृत तारे के आस-पास अंतरिक्ष और समय झुकने पर हुआ मजबूर।


लेखक : प्रशांत पंचोले

आईन्स्टाईन के सिद्धांतों के अनुसार यदि देखा जाए तो अंतरिक्ष और समय दोनों ही एक-दूसरे के सापेक्ष होते हैं। महान वैज्ञानिक आईन्स्टाईन ने अपने  जीवनकाल में कईं सिद्धांत प्रतिपादित किए हैं उन्हीं में से कईं सिद्धान्त अब प्रायोगिक तौर पर सिद्ध होते जा रहे हैं। आईन्स्टाईन के सामान्य सापेक्षता के सिद्धांत के अनुसार हाल ही में कुछ अध्ययन सामने आये हैं जिनसे यह ज्ञात हुआ हैं की एक विशालकाय मृत तारे की वजह से अंतरिक्ष और समय तारे के इर्द-गिर्द झुकने पर और लहराने पर बाध्य हुए। इन घटनाओं को फ्रेम ड्रेगिंग  या लेंस-थिरिंग प्रभाव कहते हैं।

इसके अनुसार अंतरिक्ष और समय एक विशालकाय पिंड (जो अपने अक्ष पर धुर्णन कर रहा है) के आस-पास झुक जाएगा या लहराता हुआ प्रतीत होगा। जैसे : यदि आप किसी गोले को किसी गाढ़े तरल पदार्थ में गोल-गोल घुमाएंगे तो वह गोला अपने आस-पास और साथ में गोल-गोल घुमाएगा। इस उदहारण से आपको समझ में आएगा की अंतरिक्ष और समय के साथ भी ऐसा ही होगा।

कृत्रिम उपग्रहों द्वारा जब वैज्ञानिकों ने खोज की तब यह जानकारी सामने आई थी की हमारी पृथ्वी भी इसी प्रकार का व्यवहार आपने आस-पास के अंतरिक्ष में करती हैं किन्तु यह बहुत ही सूक्ष्म अंतराल के लिए होती है इस वजह से इसे नापना मुश्किल होता है। और यदि आप इस प्रकार की घटना होते देखना चाहते हैं तो आपको किसी बड़े द्रव्यमान या किसी विशालकाय पिंड  देखना चाहिए।  वैसे इस प्रकार की घटनाएं किसी न्यूट्रॉन तारे या किसी बहुत बड़े ब्लैक होल के आस-पास ही देखने को मिलती हैं।

जब खगोलविदों ने सप्तऋषि तारामंडल का अध्ययन किया तब उन्हें उसके एक मृत पुच्छल तारे PSR J1141-6545 (जो पृथ्वी से 10000 -25000 प्रकाश वर्ष दूर है) से उत्सर्जित हो रही रेडियो तरंगों का पता चला जिसका द्रव्यमान हमारे सूर्य से अधिक है। यह एक न्यूट्रॉन तारा है तथा खगोलविदों का मानना है इसकी अत्यधिक घूर्णन गति की वजह से इसके चुम्बकीय ध्रूवों से रेडियो तरंगे उत्सर्जित हो रही हैं और इन्हीं तरंगों के विश्लेषण के द्वारा ज्ञात हुआ की उस स्थान पर अंतरिक्ष और समय थोड़ा सा झुकने पर मजबूर हुआ है। यह एक अप्रतिम घटना हैं जो अरबों और दशकों सालों में बहुत ही कम देखने को मिलती हैं। 

न्यूट्रॉन तारे से निकलने वाली पंखुड़ियों का फैलाव देखने में किसी पंखे की पंखुड़ियों जैसा प्रतीत होता है। यह पंखुड़ियां वैसी ही घूमती है जैसी पंखे की पंखुड़ियां घूमती है। इनको यदि दूर से देखा जाए तो इनका आकार सर्पाकार दिखाई देगा। यह पंखुड़ियां अपने तारे की 5 घंटे में चक्कर पूर्ण कर लेती है। इन तरंगों के अध्ययनों के अन्य संभावित कारणों को समाप्त करने के बाद खगोलविदों के समूह ने यह निष्कर्ष निकाला कि ऐसी स्तिथि  सिर्फ पुच्छल तारे के आस-पास की सामान्य सी स्तिथि को मद्देनजर रखते हुए बन रही है। इस की वजह से पुच्छल तारे में भी कईं परिवर्तन धीरे-धीरे आएँगे। जिसकी वजह से उसकी गति में अंतर या गति मद्धम होना शुरू हो जाएगी। पिछले अध्ययनों से ज्ञात हुआ था कि इस द्विआधारी प्रणाली में पुच्छल तारे से भी पहले सफेद और बौने तारे का विकास हो गया था।

नोट - सुपरनोवा विस्फोट होने के बाद बचने वाले मृत तारे को न्यूट्रॉन तारा कहा जाता है। 
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